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Hymn No. 670 | Date: 29-Jan-1999
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ताकत ना देखनीं है मुझें तेरी, रंग दे मोहें तू मोहें प्यार में तेरे ।
ताकत ना देखनीं है मुझें तेरी, रंग दे मोहें तू मोहें प्यार में तेरे ।
शरारत बहुत की है अब हर हॉल में पुकारता रहूँ प्यार से तूझें ।
इतनीं ताकत देना तू मुझें, जी भरकें प्यार करता रहूँ तूझे ।
ज्यादा से डर लगता है खुद को डरायें, दुसरों को धमकाता है।
प्रभु प्यार के सिवाय क्या करूंगा दूजा, प्यार ना मिला तो सब लागें फिका।
भैरी बन गया हूँ मैं अपना, प्यार में तेरे सब लुटातें चला ।
कोई शिकवा ना है कीसी से, प्यार के सिवाय पता ना है कुछ मुझें ।
सचमुच गयीं है मेरी दुनिया सिमट, प्यार के सिवाय कहीं कुछ पता नहीं ।
प्यार के आगे बोलती बंद हो जाती है, प्यार में कुछ ना कहनें करनें का है मन करता ।
जिनसे डरा करता था, अब वें मुझसें प्यार में गुप्तगु किया करते है ।


- डॉ.संतोष सिंह