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Hymn No. 672 | Date: 29-Jan-1999
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रोता था पहलें बहुत मैं, अब खोता जा रहा हूँ तुझमें ।
रोता था पहलें बहुत मैं, अब खोता जा रहा हूँ तुझमें ।
जब से तेरा हाथ सर पे पाया, मन का हर डर निकलता जा रहा है ।
तेरे करीब आनें से, जाना जिंदगी का एक और पहलू ।
मर खफ गये न जाने कीतनी बार, साथ मिला तेरा इस बार ।
मन जो भागता – फिरता था यहाँ – वहाँ तेरी कृपा सें शांत हुआ।
दिल भी लगनें लगा सबमें, जब से प्यार हुआ है तुझसे ।
हैरान हो जाता हूँ सोच के यें, कैसा था क्या हो गया तेरी दया से ।
खाँबो में जो करता था मुलाकात, अब तो दिन को होनें लगी ।
नासमझ है अभी, भी भटकनें ना देंना तू कभी ।
शिद्दत से मिला है तू, दामंन ना छोडनें देंना हमें तेरा ।


- डॉ.संतोष सिंह