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Hymn No. 680 | Date: 31-Jan-1999
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लाचारी में ना फसंना है, हर पल तेंरी ओर बेडते है रहना।
लाचारी में ना फसंना है, हर पल तेंरी ओर बेडते है रहना।

उन्माद भरा जीवन छोडकें, उमंगों का गीत गाना है ।

तुझसे जुडनें के लिये हाल होना है अपने आपको अनुरूप तेरे ।

जरूरत को बिना गले लगाये, हर पल करीब तेरे है जाना ।

यें सब है असंभव, संभव बना देंगा तेरा आशीष ।

वश में हमारें कूछ ना है, वश में हो जाना है तेरे ।

प्रीत जो है तुझसे, तेरा मीत बन जाये हम हरदम के लिये ।

मैं जानता हूँ तेरा सान्निध्य पाना है सबसे अनोखी बात ।

अब कुछ भी ना है हाथ में मेरे, हम तो हो चुकें है तेरे ।

जरूरत ना है तूझे, हम तो घायल हो चुकें है प्यार में तेरे ।


- डॉ.संतोष सिंह