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Hymn No. 69 | Date: 13-Jan-1997
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संतानें है हम सब परम पिता की,
संतानें है हम सब परम पिता की,
स्वार्थों के चलते रखते है द्वेष आपस में।
बिखरे हुये अंश है, एक ही परमात्मा के,
अज्ञानवश बँट गये है जाति की दीवारों में।
विभिन्न नजर आते है रंग और रूपों में,
पर रंग लाल है हम सबके रक्तों का ।
लकीर का फकीर ना बन हो जा जुदा सबसे
उसका ही अंश समाया, हर तन में ना है कुछ तेरा ।
- डॉ.संतोष सिंह
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रोके रोक सका ना कोई, बीत जाता है हर पल ।
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