VIEW HYMN

Hymn No. 698 | Date: 03-Feb-1999
Text Size
रिमझिम बरस रहा है तेरा प्यार हमारें उपर ।
रिमझिम बरस रहा है तेरा प्यार हमारें उपर ।
रूंधे कंठ की पुकार सुनकें, तू प्यास बुझा रहा है हमारी ।
धीरें धीरें तू समेंट रहा है हमको अपने प्यार भरें दामन में।
माया के चक्रव्युह को तोड़ना तू सीखा रहा है प्यार भरें गीतों से ।
बिछुडा था तुझसे वासना के रंग में रंगकें ।
मन के कांटों को निकालना सीखाया दिल में डूबके ।
तूने हमें क्याँ न सिखाया, हर भेद को भुलाकें जीना सीखाया ।
रिश्ता तेरा तो सबसे है, हर इक् फूल का तू है माली ।
कीमत तेरी अदा कोई कर ना सकता, कीतना भी कर लें भला करम ।
अपने प्यार से जीवन के हमारें मर्म को बदल देता है तू ।


- डॉ.संतोष सिंह