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Hymn No. 700 | Date: 04-Feb-1999
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तन का मैंल धोया कई बार, मन का मैल मिटा न पाया ।
तन का मैंल धोया कई बार, मन का मैल मिटा न पाया ।
जीवन के विसंगतीयों से पीछा छुडा न पाया, प्यार कैसे करेंगे हम।
मौका मिला है इस बार, सद्गुरू के चरणों में सब कूछ भूलायेंगे।
अपनीं हद्दों को तोड़के उसकें करीब हम जायेगे ।
दिया है उसनें बहुत कुछ, मांगा ना हमसे कभी कुछ ।
मौंका मिलतें ही अपने आपको कर देंगे निलाम उसके लिये ।
चुपकें से उसको प्यार करेंगे हम, दिन – रात उसकें नाम की आहें भरेंगे ।
अपना ना है कुछ बनाना, उसकी छवी को दिल में है संजोना ।
उसकी मौजुदगी है सब जगह, पल – पल प्यार का गीत है सुनाना ।
चरणों में बैठकें नित्य नयें – नयें तराना गाना हें खुदको भुल जाना है ।
- डॉ.संतोष सिंह
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