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Hymn No. 702 | Date: 04-Feb-1999
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जालीम में बहुत बडा, प्यारा दिलवाला तुझसा कोई नहीं ।
जालीम में बहुत बडा, प्यारा दिलवाला तुझसा कोई नहीं ।
करतें हुये भुलतें है, तुझको, तेरे पास आकें रोना रोते है ।
नित्य तूझें सताते है, उलहना जी भरके देतें है अपने करमों के लिये ।
मगर प्रभु प्यार हमारा सच्चा है, मन को खींचता है दिल तेरी ओर ।
झुठ न बोला मैंने कभी तुझसे अब तक, जैसा था वैसा करीब आया तेरे ।
जो भी कहाँ प्यार में बहके, सच्चें दिल से पुकारा है तूझें ।
व्यर्थ के कर्म कई कीयें, हर बार तेंरी कृपा से कोई ना कोई सीख पाया ।
अजीज आ गया हूँ मैं अपने आप से, हर पल दुडता हूँ साथ तेरा ।
सब कुछ गवानें को तैयार हूँ बैठा, तेरां बनके हर कर्म को निभायेंगे।
कीसी बंधन में ना है मुझे बंधना, बंध जाऊँ मैं तेरे बंधन में।


- डॉ.संतोष सिंह