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Hymn No. 703 | Date: 04-Feb-1999
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परवाह क्यों करूं मैं कीसीका, जब हाथ हो सर पे सद्गुरू का।
परवाह क्यों करूं मैं कीसीका, जब हाथ हो सर पे सद्गुरू का।
डगर हो कीतना भी कठिन, डर कीस बात का जब हाथों में हाथ हो उसका।
सोचा ना करते है प्यार में तो अहसास रहता है मस्ती का।
सिरफीरें ही बनते हें दीवानें, प्यार के वास्तें आगे पीछे का ख्याल ना करतें ।
चल पड़ें तो रूकनें का नाम क्यों लें, मंजिल अगर प्यार है तो कोई ओंर बात क्यों।
जोर मारता है दिल मे गीत उसकी, उस समय समझ नहीं आता है कूछ ।
मिलतें है भगवान भी बार – बार, सद्गुरू का साथ मिलता है लाखों में एक बार ।
सब निष्फल होता है जब तक कृपा ना बरसें उसकी हमपे ।
लाख तू कूछ कर लें रीझता नहीं, रीझ जाता है जब तो साथ छोडत नहीं।
मुश्किल है कुछ कहनां बारे में उसके, कर लों प्यार जी भरके भरेंगा ना ही दिल कभी।


- डॉ.संतोष सिंह