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Hymn No. 704 | Date: 04-Feb-1999
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धडकना बंद कर दें मेरा दिल, कोई शीकायत ना करूंगा ।
धडकना बंद कर दें मेरा दिल, कोई शीकायत ना करूंगा ।
तुझसे मिलना अगर बंद हो जायेगा, तडप – तडपे मर जाऊंगा।
कतई बरदाश्त न कर पाऊँगा तुझसे दूर होनें का मैं ।
गजब की तनहाई महसुस करता हूँ तेरा नाम लेतें ही।
जलता हूँ तेरे प्यार में दिन रात, कोई क्याँ जलायेंगा मुझें ।
बन चुका हूँ मैं तेरा परवाना, कोई और क्या बनायेंगा मुझें ।
समझ नहीं पाता अपने आपको, तेरे प्यार क्या हो जाता है मुझे ।
दिन – रात दिल बिचारा रहता है परेशां मुलाकात के लिये मुझसे ।
तेंरी हर अदा को समझनें का यत्न करता है, समझ नहीं आता कुछ उसे।
तेंरी बातों को जेंहन में बसा लेंना चाहता है, याद नहीं आता कुछ उसे ।
कैसे साकार करेंगा अपने खाबों को, जब तूझें युं ही भूलेंगा हर बार ।
जुदाई कीसी बात की नामंजुर है वो तो फिदा हो चुका है तूझपे ।


- डॉ.संतोष सिंह