VIEW HYMN

Hymn No. 71 | Date: 18-Jan-1997
Text Size
अच्छा हूँ या हूँ बुरा जैसा भी हूँ मैं तेरा हूँ तेरा ही रहूँगा ।
अच्छा हूँ या हूँ बुरा जैसा भी हूँ मैं तेरा हूँ तेरा ही रहूँगा ।
पास ना है तू तो क्या से, दूर भी ना हूँ मैं तो तुझसे ।
छोड के भी ना छोड पाऊँगा तेरा मेरा साथ है ऐसा ।
बिन रिश्ते के है रिश्ता तेरा मेरा, सब कुछ लगता है तू मेरा ।
गिले – शिकवे तुझसे है ढेर सारे, मन में संजों के जाते है तेरे पास ।
मिलते ही छिन्न भिन्न हो जाते है तुझको पाके खुद को भूल जाते है ।
सवाल रहते है लाखों मनों में हमारे, तेरे गीतों को सुनते ही मिल जाता है जवाब ।
मन को छोड ख्यालों में बसता है तू हमारे, फिर भी रहता हूँ तनहा तेरे लिये ।
इनायत चाहता हूँ तेरी नजरों की, पलक बंद हो या खुली झलक तेरी चाहता हुँ ।


- डॉ.संतोष सिंह