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Hymn No. 72 | Date: 22-Jun-1997
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इय मायावी संसार के हर रास्ते जाते है, तेरे घर की और ।
इय मायावी संसार के हर रास्ते जाते है, तेरे घर की और ।
मुका (मुकाम) बना ना सका कोई, आया है तो जायेगा तू जरूर ।
दुःखों को हँसते हुये कर लो स्वीकार, आनंदमय हो जायेगा जीवन ।
कितनी भी कीमत दे दें पा ना सकेगा, जिसने पाया उसको वो कभी ना खो सकेगा ।
तेरी बेचारगी पे खायेंगा, ना कभी वो तरस, पलके बिछाए बैठा है – खुद्दारों के लिये ।
जिसने साथ पकड़ा उसका, निभाया सदा साथ उसने ।
हर हालात में याद जिसने किया, बिन देर किये मदद की उसकी ।
बांधा ना कभी अपने आपको, वो तो मुक्त है सर्वत्र के लिये ।


- डॉ.संतोष सिंह