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Hymn No. 718 | Date: 07-Feb-1999
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मेरे मालिक, मेरे मौला, मेरे रहबर, भेद न करता तू किसी से ।
मेरे मालिक, मेरे मौला, मेरे रहबर, भेद न करता तू किसी से ।
फिर क्यों तेरे बंदे भेद करते है तुझमें ।
ऐ.. मेरे परमपिता परमेश्वर क्यों तुझे रखते है किसी गिरीजाघर में ।
तेरी शोभयात्रा क्यों नहीं निकालते किसी मस्जिद से ।
हे मेरे जगदीश्वर समझ नहीं आता कैसे हक मिल गया तेरे बंदो को बाँटने का।
अरे उनको तो रहना चाहिये बनके धूल तेरे चरणों में ।
जान नहीं पाता मालिक कौन किसका है, काटो तो खून मिलता है सभी में।
हर शर्म को छोड़ वे भेद बताने लग गये खुदा में ।
बहुत बाँट चुके तुझे अब तू न बँटना, मिटा दे सारे भेदों को ऐ मेरे परमेश्वर ।
आना होगा फिर से समझाना होगा, तेरे पुत्रो को प्यार की राह दिखानी होगी ।
- डॉ.संतोष सिंह
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