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My Divine Blessing
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Hymn No. 720 | Date: 08-Feb-1999
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कैंसे बताऊँ मुझे क्या मिल गया, जो तु मिल गया ।
कैंसे बताऊँ मुझे क्या मिल गया, जो तु मिल गया ।
सोचा जो न था वो हो गया, हाथ में कुछ ऐसा आ गया ।
आसरा मिला उस दर पे, जहाँ से कोई कभी न बेसहारा हुआ ।
रत्नों की खान फीकी है, उसके दर की रज के आगे ।
तरसते है न जाने कितने जन्मों से लोग, पास जाने के लिए उसके ।
सबकुछ झुठा नजर आता है प्यार के आगे उसके ।
कीमत कोई चुका नहीं सकता, पल भर साथ के वास्ते ।
हर राह गुजरती है कभी न कभी उसकी दर की ओर से ।
निजात दिला जाता है हमें हमारे अगूढ़ कर्मो से ।
दिल से रिझाया जिसने उसे, पास बुलाया उसको अपने ।
- डॉ.संतोष सिंह
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