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Hymn No. 722 | Date: 08-Feb-1999
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मुझे न है पता क्या देने जा रहा है तू, हाँ हम खोजते है साथ तेरा
मुझे न है पता क्या देने जा रहा है तू, हाँ हम खोजते है साथ तेरा
तू तो था सदियों पुराना नाथ हमारा, तेरे बिना अनाथ है हम ।
साथ खोजता हूँ तेरा न पाने के लिये हाँ तुझसे अपनाने के लिये ।
जिल्लत भरे जीवन को छोड़के, तेरे पहलू में छुप जाने के लिये ।
गोया हम तेरे खास न हैं, दास तो बन सकते है तेरे ।
बदमजा हो गया है मेरा मन, दुनिया उसको न है सुहाती ।
दिल को तू भूलाता है हर पल, तो कैसे कहीं और मजा आता ।
काश जो मैं कहता हूँ दिल से, उसे सच्ची करके जीवन में दिखा पाता ।
निराश न हूँ मैं अपने से, बेकरार हो रहा हूँ तुझे पाने के लिये ।


- डॉ.संतोष सिंह