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Hymn No. 723 | Date: 08-Feb-1999
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हाथ था इस जीवन में कई-कई बार, जितना सिखाया तूने ।
हाथ था इस जीवन में कई-कई बार, जितना सिखाया तूने ।
चूक की थी हमने हजारों–हजार, बेचूक बनाया हमें तूने ।
परिस्थितियों का शिकार हुआ दिल, विपरीत परिस्थिति में जीना सिखाया तूनें।
कमी कौन सी न थी हममें, हर कमी को दूर किया तूने ।
इच्छाओ की आग में जलते थे, प्यार का लेप किया तूने ।
ख्वाब देखते थे बड़े-बड़े, सक्षम बनाया तूने हमें ।
तोड़ा कई बार अपने वादे को, वादा निभाना प्राण देके तूने सिखाया ।
गहरी नींद में सोये थे, जगाके दर्शन कराया तूने अपना ।
अपनी गल्तियों से सबक लेना सिखाया हमें तूने ।
आरजू मिलने की तुझसे बहुत थी, पास बुलाया तूने ।


- डॉ.संतोष सिंह