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Hymn No. 725 | Date: 09-Feb-1999
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माता कहूँ या पिता क्या फरक है पड़ता ।
माता कहूँ या पिता क्या फरक है पड़ता ।
जो तू है वहीं रहने वाला, तेरे आगे दुनिया का कोई नियम न है चलता ।
रिश्ते तो तुझसे अनेक है, निभाना तो कोई एक है ।
हर रिश्तें में प्यार का रिश्ता है सबसे सुहाना ।
जिसका दिल इसमें लग गया. उसने तुझको जाना ।
मजबूर करता है, पास गये बगैर चैन न आता ।
प्यार में पुकार लेते है, कुछ भी करके तो आता है जरूर तू तो ।
फिर भी समझ नहीं आता, दिल को क्या हो जाता है ।
प्यार में पास तुझें अपने पाते ही, हर पल है बतलाता ।
होश में हम न रहते य ही प्यार है कहलाता ।


- डॉ.संतोष सिंह