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Hymn No. 74 | Date: 23-Jan-1997
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व्यतीत होना ही अतीत है, जो आज साथ है, उनको छोड जाना है ।
व्यतीत होना ही अतीत है, जो आज साथ है, उनको छोड जाना है ।
परिवर्तन का नाम जीवन है, आज जहाँ पर्वत है, कल वहाँ गहरे सागर होगे।
जान जान के कितना जाना, जान न पाया सारे जीवन में, मौत के बाद ही जान पाया ।
हाल हर एक का एक ही है, अब पछताय होत क्या जब चुग गयी चिडिया खेत ।
व्याकुल ना कर मन को, मोह को छोड, प्रीत कर ले सबसे, यही रख ध्येय जीवन का ।
क्या तेरा, क्या मेरा, जो है सब उसका ही है, उसने चाहा, किया जतन या दिया लुटाया ।
रोना किस बात का, तोड़ना है हर एक को हर एक कर्मों के बंधन को ।
इस जन्म में या उस जन्म में उसका ही था तू उसका हो के रह जाना है ।


- डॉ.संतोष सिंह