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Hymn No. 75 | Date: 28-Jan-1997
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गीत मेरे जनमे हुये है तेरी प्रीत से ;
गीत मेरे जनमे हुये है तेरी प्रीत से ;
भूला हुआ था याद दिलाया है तेरी तसवीर ने ।
कर्मों से बंधा हुआ मैं जन्मों के बंधन में,
इसे सहजता से निभाऊँ तेरे आशीर्वाद से ।
यारी मेरी है सिर्फ तुझसे तेरे गीतों से,
गाता हुआ खो जाऊँ तुझमें, तेरी यादों के संग ।
चाहता हूँ, अब भी तुझसे माँगना बहुत कुछ,
सबसे पहले मैं तुझसे ही तुझको माँगना चाहूँ ।
सुख में रख या दुःख में रख जो तेरी मर्जी,
रखना है तो रख तेरे संग आनंद के महासागर में ।
अब है तेरी रजामंदी में मेरी रजामंदी ।
फिर भी रहना चाँहू तेरे सान्निध्य में हर वक्त ।


- डॉ.संतोष सिंह