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Hymn No. 76 | Date: 01-Feb-1997
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अंजाने तुझसे मेरी मुलाकात हो गयी,
अंजाने तुझसे मेरी मुलाकात हो गयी,
नाज है मुझे मेरी किस्मत पे ।
गुमा ना करता हूँ तुझे पाने का,
पर मस्ती छा गयी है मेरी जिंदगी में ।
प्यार तो मैं तुझसे बेइंतहा हूँ करता,
पर रह रहके खो जाता हूँ तेरे भवसागर में।
तोड़ना है तुझे मेरे हर एक बंधन को;
मुझको बन जाना है एक अंग, तेरे निराकार रूप का ।
अर्पित करता हूँ मैं तुझे तेरे शब्दों में रचित;
तेरे गीतों की माला निमित्त होना ही धन्य भाग मेरा ।


- डॉ.संतोष सिंह