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Hymn No. 77 | Date: 01-Feb-1997
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अब जब दिल आ गया है तुझपे ;
अब जब दिल आ गया है तुझपे ;
क्यों परवाह करूँ जमाने की ।
यह रोग लगाये ना लगता है।
छोडे तो जाती है निकल जान ।
मतवाला हो गया मैं याद करके तुझे,
मन नहीं लगता है दुनियादारी में ।
अब दिल न माने तेरे बिना,
आस लिये भटकूँ तेरे जग में ।
बेचैन मन को चैन न आये ;
तू ही है मेरे इस रोग की दवा ।


- डॉ.संतोष सिंह