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Hymn No. 78 | Date: 04-Feb-1997
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झुम उठता है मेरा मन तुझे याद करके
झुम उठता है मेरा मन तुझे याद करके
डूब जाता हूँ आनंद के सागर में ले के नाम तेरा ।
हर हाल में हो जाता हूँ खुश तेरे ख्यालों में;
हो जाता हूँ गगन तेरे गीतों को गाते – गाते।
तेरा बुलावा आतें ही दिल मचल उठता है पासे जाने के लिये
तन तो बहुत देर से है पहुँचता, मन को लेके दिल पहुँच जाता है पहले
हाल बुरा होता है दूर रहने पे तुझसे,
जुबां से विरह गीत निकलते है तडपता हूँ मछली की तरह ।
सुन ना सकता अब कोई कारण, दूर रहने का तुझसे ।
तेरे बगैर जीवन का हर लम्हा बेकार सा है लगता ।


- डॉ.संतोष सिंह