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Hymn No. 79 | Date: 06-Feb-1997
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मजा आ गया, मज़ा आ गया, मजा आ गया ।
मजा आ गया, मज़ा आ गया, मजा आ गया ।
तन के बंधन को भूल के, लेके नाम तेरा मज़ा आ गया ।
हर तरफ तू ही तू है तेरा ही स्वरूप है मज़ा आ गया ।
ना हम थे, ना रहेगे, ना है हम जानके मजा आ गया ।
तू था, तू ही रहेगा, तू ही है जानके मजा आ गया ।
तेरे हर रूप का क्या कहना मज़ा आ गया ।
सबसे अदभूत सबसे प्यारा प्रेम के बंधन में बँध;
निराकार का आकार में ढलना मजा आ गया ।
मुझपे तेरा नशा छा रहा है तेरी हर बात में मुझको मजा आ गया ।
मन झुमें, तन नाचे, बिन पिये नशा छा गया;
तेरे अपुर्व रूप का नशा छा गया मज़ा आ गया ।
मजा आ गया, मजा आ गया, मज़ा आ गया ।


- डॉ.संतोष सिंह