My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 744 | Date: 14-Feb-1999
Text Size
काशी का शिव आया दर पे मेरे, स्वागत करना न जानूं मैं ।
काशी का शिव आया दर पे मेरे, स्वागत करना न जानूं मैं ।
पगलाया मैं इतना, देखके उसको भूला प्रणाम करना ।
वो भोला, मुस्कराते हुये स्नेह भरी आखों से प्यार का जाम पिलाता रहा ।
स्थिर हुआ तन-मन मेरा, पाके उसके सामने हतप्रभ सा खड़ा था ।
डुगडुगी जब उसने बजायी, दिल मचला बोले बोल न फूटा ।
आखें भर आयीं, विस्मृत खड़ा रहा मैं निहारते उसको ।
मुस्कराता खड़ा था वो, न वो बोला, न मैं बोला, न जाने सुध-बुध कहाँ खो गयी थी मेरी
चरण छूने का जब ध्यान आया, झुकके किया प्रणाम उसको ।
सर अपना ज्यों ऊपर उठाया, सामने से उसको ना देख पाया ।
बहुत झल्लाया अपने ऊपर, चरण छूते ही चरण पकड क्यों ना लिया ।
वो साथ जाता, हम भी संग उसके चल देते ।
भस्म बनाके भोला के चरणों को छू लेते ।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
मत पूछ मुझे क्या हो जाता है, तेरे सामने आते ही दिल खो जाता है ।
Next
तुझसे पाया तुझको अर्पित किया, निमित्त बनाके धन्य भागी हुआ ।
*
*