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Hymn No. 745 | Date: 14-Feb-1999
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तुझसे पाया तुझको अर्पित किया, निमित्त बनाके धन्य भागी हुआ ।
तुझसे पाया तुझको अर्पित किया, निमित्त बनाके धन्य भागी हुआ ।
करते है सदा अपने मन की, नाम तेरा दे देते है ।
अपने दामन का दाग तेरे दर पे जाके छुड़ाते है ।
उपहार देते है तुझे, दुनिया में नाम कमाने के लिये ।
मौका हाथ में आते ही, सभी से कहते थकते नहीं ।
मुस्कराता रहा तू सदा, हमारे जीवन का विष चुपचाप पिया ।
हमने साथ दिया या न दिया, तूने साथ सदा निभाया ।
अहसास कभी न करना चाहा, दोष तेरा देना चाहा ।
जब जोश था जवानी का, तब होश में न था ।
वक्त रहते संभाला पास बुलाके अपने तूने ।
- डॉ.संतोष सिंह
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