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Hymn No. 746 | Date: 14-Feb-1999
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मधुर-मधुर है मुस्कान तेरी, तुझसा मधुर कोई नहीं ।
मधुर-मधुर है मुस्कान तेरी, तुझसा मधुर कोई नहीं ।
हर बात तेरी है सुहानी, उसके आगे लगती सब बचकानी ।
ज्ञान की शाश्वत मुर्ति तू, अज्ञानमय संसार सारा ।
प्रेम तेरा है अनोखा, एक न एक दिन हर दिल डूबता तुझमें ।
तेरी कहानी सबसे निराली, अमर, अनंत गूंजती न जाने कितने कालों से ।
समर्पण किया सबने तुझमें अपना सब कुछ अर्पण करके ।
पाते ही तुझे बौराये, तू जलदी कीसी के हाथ न आये ।
खुश करने को तुझे सब चाहते, राहत मिलती है पास आके तेरे ।
सब कुछ घुटता है तू ना छुड़ाये छूटता किसीसे ।
साथ तेरा पाना चाहे सभी, तेरी बतायी राहों पे चलना है कठिन ।
- डॉ.संतोष सिंह
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