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Hymn No. 747 | Date: 14-Feb-1999
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सुन ले प्रेम की पुकार को, जला दे हमारे भीतर ज्ञान के चिराग को ।
सुन ले प्रेम की पुकार को, जला दे हमारे भीतर ज्ञान के चिराग को ।
छबि जो उभरेगी हमारे चित्त पे, मिटाये न मिटेंगी किसी काल में ।
गुमनाम हो जायेंगे, तेरे कुछ काम आ जायेंगे ।
कुछ आता तो न है हमे, संग रहके तेरे तेरा कुछ नाम कर जायेंगे ।
साथ होगा जो तू सरलता पूर्वक कठिन राह पे चलते चले जायेंगे ।
हर पल तेरा ही खयाल होगा, बातों के सार में तेरा ही वास होगा ।
तुझसे परे न होगे हम, हमारा तू होगा सदा के लिये ।
अदा कर नहीं सकता कर्ज तेरा, जुदा होने से तुझसे डरता हूँ ।
कहने को तो बहुत कुछ हूँ चाहता, जो तू पास बुलाये तुझे दिल का हाल सुनाऊँ ।
लुभायेगें तुझको अपना बनाने के लिये, कुर्बान कर देंगे सब कुछ तुझपे ।
- डॉ.संतोष सिंह
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