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Hymn No. 753 | Date: 15-Feb-1999
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जब से देखा है तुझको, ठहरती नजर न किसी पे ।
जब से देखा है तुझको, ठहरती नजर न किसी पे ।
याद आते ही जा टिकती है सीधी तुझपे ।
हर ख्याल मन का हवा हो जाता है ।
जीवन का हर पल तेरे संग जवाँ हो जाता है ।
काबू में हूँ तेरे, बेकाबू हो चला मैं ।
दीदार के वास्ते जो चला दर की ओर तेरी ।
शेर बन जाता है दिल मेरा, साथ जो तेरा मिला ।
धज्जियाँ उड़ाता चला जाता हूँ तन-मन की ।
सम्भाले खुदके सम्भलता नहीं, तेरा प्यार पाकें खुद ही सम्भल जाता हूँ ।
आग का काम करती है तेरी याद, जीवन की हर इच्छा को खाक में मिलाती जाती है ।
भाता नहीं अब मुझे कुछ भी, जो कुछ भी, जिसमें तू समाया न रहता हो ।
पस्त हो जाता हूँ जो दिल के पास तू नजर नहीं आता ।
कुछ का चुछ हो जाता है, जो तू साथ होता है ।
पास होना तेरे इम्तहाँ में मेरे बस की बात नहीं ।
लेना होगा इम्तहाँ तुझे मेरा, मुझे तो चाहिए बस साथ तेरा ।


- डॉ.संतोष सिंह