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Hymn No. 755 | Date: 15-Feb-1999
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ये तो वो है जो कहीं भी है, जो कहीं भी है वो यहीं है ।
ये तो वो है जो कहीं भी है, जो कहीं भी है वो यहीं है ।
इसको पाया तो सबको पाया, पाके इसको न पाया तो कुछ न पाया ।
जिसके दिल में है ये समाया, ईश्वर तेरा उसने नाम कमाया ।
गँवाते है तो हम सारे, कमाता तो बस वो इक जो ईश्वर का हो जाता ।
आंखो में नहीं किसीके, दुनिया में रहके ईश्वर को पास बुलाता ।
सिलसिला चलता है अनंत काल से अनंत काल तक, कोई जान नहीं पाता ।
प्रभु के प्रिय प्रभु के पास जाते है सीखने दिल की भाषा ।
जिसको सुहाती न हो दिल की बात, चाह के पहचान नहीं पाता ।
प्यार के गीत गाके अपनों के भीतर अलख सदा वो जलाता ।
गैर कोई न है सब उसके अपने है, जिसने देखा सपना उसका ।


- डॉ.संतोष सिंह