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Hymn No. 756 | Date: 15-Feb-1999
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कोई शक न, कोई सवाल न है, प्रेम में तो कोई दिवाल न है ।
कोई शक न, कोई सवाल न है, प्रेम में तो कोई दिवाल न है ।
आनंद की बरसात है हर ओर, प्रेम में किसीको किसीका ख्याल न है ।
उमंगो से भरा है जीवन, हर रोज नई प्रेम की है कहानियाँ ।
दिल तो रहता है. सदा जवाँ, पुराना होता है तन-मन हमारा ।
बेसहारों का प्रेम होता है सहारा, सच्चे दिल को आसरा ना चाहीए किसीका ।
तव्वजो देता है प्रेम को प्रेम से प्रेम पाने के लिये ।
क्या अपना, क्या बेगाना प्रेम का तो हर दिल है ठिकाना ।
..... न होता है जीवन में किसीको, अगर प्रेम होता है दिल में ।
कहने की न है जरूरत, प्रेम तो पहचान लेता है पल भर में ।
छिपाये न छिपता रोग किसीसे, निगाह मिलते ही हाले दिल बयाँ करता है ।


- डॉ.संतोष सिंह