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Hymn No. 757 | Date: 15-Feb-1999
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ठहरती न है नजर किसी पे, जब ठहर जाती है तुझपे ।
ठहरती न है नजर किसी पे, जब ठहर जाती है तुझपे ।
होश मेरा उड़ जाता है, जब देखता हूँ तुझको जोश आ जाता है ।
कसूर न है इसमें तेरा, कसूरवार तो ठहरा दिल मेरा ।
गाहे-बगाहे ढूंढे तुझको, मन ही मन सोचता है नये बहाने ।
कहता नहीं किसीसे वो, कह जाती है आखें मेरी सबसे ।
ऐ रब कब तक जुदा होना लिखा है, तुझसे किस्मत में ।
मोहब्बत की पुकार है ये, न ही रहम चाहता हुँ तुझसे ।
दरकिनार तू कर सकता नहीं मुझे, ये तो प्यार की ललकार है ।
वार कोई न करता हू तुझपे, मैं तो प्यार का शिकार हूं ।
जिक्र कितना भी करुं खुदशे, फिक्र तेरी जाती नहीं ।


- डॉ.संतोष सिंह