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Hymn No. 758 | Date: 16-Feb-1999
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अंदाज बयाँ कर पाना तेरा मुश्किल है, जो होता है वही तो होता नहीं ।
अंदाज बयाँ कर पाना तेरा मुश्किल है, जो होता है वही तो होता नहीं ।
तेरी कृपा रहती है तभी तो समझ पाते है, नहीं तो कहा कुछ जान पाते ।
हालात बदलते रहते हैं, बदलते न देखा तुझे कभी ।
अनुरूप तेरे ढलते पाया सबको, जो न ढला उसको पीछे छूटते पाया ।
जानने की इच्छा न है, हम तो खीचे चले आते है प्यार में ।
हर भेद को मिटते देखा, प्रेम में जो तेरे करीब आया ।
अंधकार में अपने साये का साथ छोडते देखा, हर हालात में तेरा साथ पाया ।
कर नहीं सकता तेरा बखान, महासागर के सामने क्षुद्र रेत के कण की क्या बिसात
ऐ मेरे मौला, मै तो बौराया, प्यार पाके तेरा गुणगान करने चला ।
हिम्मत देख इस निकम्मे की जो तुझे प्यार करने चला ।


- डॉ.संतोष सिंह