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Hymn No. 760 | Date: 16-Feb-1999
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नजर तेरी है ऐसी जो भुलाये न है भूलती ।
नजर तेरी है ऐसी जो भुलाये न है भूलती ।
फूल बनके अंकित हो जाती है जेहन में हमारे ।
हर बार बदला तन-मन मेरा, स्वतः तुझको पहचान गया ।
भुलाये न है भुलाता, जो याद तेरी दिल में है समायी ।
रमता रहा तू कहीं भी, आज नहीं तो कल ढूंढ लीया ।
महक जो बस गयी है हमारे भीतर, हवा के रुख से भाँप लिया ।
कयाल न लगाता हूं तेरे बारे में साक्षात पाता हूँ ।
मेरी निगाहें अब तेरे सिवाय किसी को न पहचान पाती ।
प्रयास करके तुझको है पाना, दिल को आयेगी मुश्किले ।
तू ना मिलता किसी पल, परेशा होने लगता हूँ ।


- डॉ.संतोष सिंह