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Hymn No. 773 | Date: 19-Feb-1999
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प्रियतम तुम क्या जानो प्यार क्या होता है ।
प्रियतम तुम क्या जानो प्यार क्या होता है ।
खेलता है तू अनेक दिलों से अनेक बार ।
कैसे बताऊँ निर्मोही, प्यार में क्या न होता है ।
प्यार जिसने किया बदहाल हुआ, खुश तो प्यार को देखके हुआ ।
खामोश रहा चुपचाप निहारते, प्यार को प्यार करता रहा ।
गिड़गिड़ाया न कभी प्यार के आगे, लहू से इतिहास लिखता रहा ।
अटल निगाहों से अपने प्यार की गाथा सुनाता रहा ।
मिटने की बारी आने पर ना गिड़गिड़ाया दिल में प्यार की छवि लेके कुर्बान हो गया ।
ज़िद्द की कोई बात न थी, प्यार की दीवानगी होती है ऐसी ।
शमा सलामत रहे, परवाने तो कई-कई जलके खाक होते है ।


- डॉ.संतोष सिंह