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Hymn No. 774 | Date: 19-Feb-1999
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गुफ्तगू न करता हूँ, सरेआम ये कहता हूँ तू है मेरा
गुफ्तगू न करता हूँ, सरेआम ये कहता हूँ तू है मेरा
जो चाहा तुझको एक बार, बदली ना जा सकती है चाहत मेरी ।
मौत आ जाये तो खुशी से दामन थाम लूंगा तेरा प्यार समझके ।
अंदाज मुझे भी न है मेरे प्यार का, जाम लेने के चक्कर में होश गँवाया कई बार ।
सता कोई क्या सकता है मुझे, प्यार में जो लापता हो चुका हूँ तेरे ।
साथ कैसे किसके आऊँगा, प्यार का साथ जो सदा निभाऊँगा ।
पाना किसे कहा है कुछ, प्यार में सौदा का कोई काम न होता है ।
हाले दिल बयाँ क्या करुं, निगाह मिलते ही हर हाल कह जाता हूँ तुझसे।
राज़ फाश अब क्या होना है, जिंदगी के हर पन्नों पर जो तेरा नाम लिखा जा चुका है ।
भेद बरतूँ तो किस बात का, दिल का हर भेद मिट चुका है प्यार में ।


- डॉ.संतोष सिंह