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Hymn No. 777 | Date: 19-Feb-1999
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जीवन मरण हो हमारा तेरे श्री चरणो में ।
जीवन मरण हो हमारा तेरे श्री चरणो में ।
भरण-पोषण होता रहे, हम तेरा भजन करते रहें ।
मुख्य कर्म तेरे प्रति करें, गौण हो दुनियादारी ।
अलग से कुछ ना चाहिये, संतुष्ट रहें तुझमें सदा ।
जुदा कई बार हुये, इस बार न हों हम तुझसे ।
तुझसे जो पाया, तेरी अमानत समझके दें सबको ।
मेरा कुछ न हो सकता है, जब तक हुये न हम तेरे ।
हुक्म उदूली का ख्वाब न आये, रहे तेरे ख्यालों में ।
माया का जाल चारों और है फैला काटे न है कटता ।
तेरे नाम की कटरिया से काटके चल दूँ तेरी ओर ।


- डॉ.संतोष सिंह