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Hymn No. 803 | Date: 27-Feb-1999
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भूला मैं सब कुछ, भूला खुद को यादो में तेरी
भूला मैं सब कुछ, भूला खुद को यादो में तेरी
मेरे ख्वाबो में तू है, ख्वयालों में तू है, तेरे सिवाय हर बात अधूरी है ।
मेरे मन में उमंग जागे तुझसे, तुझे देखते ही, नवजीवन का संचार होता मुझमे ।
तडपूँ जैसे जल बिन मछली, तेरे बिन इक पल रह न पाऊँगा ।
जंग के किसी कोने में जाऊँगा, तेरा सानिध्य हर जगह – चाहूँगा ।
आंसू आखों में उभरे, तू संग होता है, इस अनुभूति से ।
पागल कहे कोई फिक्र न है मुझे, तेरे प्यार में पागल हो जाना चाहूं ।
हाजिर हजूर है तू मेरा, जहाँ तुझे चाहूँ वहाँ तुझे पाऊँ ।
तेरे वास्ते तोड़ दूंगा सारी सीमाओं को, बांध न पायेगा अब कोई मुझे ।
गाता हूँ गीत तेरा, बहाना बनाता हूँ मुलाकात के वास्ते ।


- डॉ.संतोष सिंह