VIEW HYMN

Hymn No. 804 | Date: 27-Feb-1999
Text Size
धूम मची है तेरी, दिल में लेके तुझे हर पल ।
धूम मची है तेरी, दिल में लेके तुझे हर पल ।
जल-जला उठता है सीने में जब तक मुलाकात न हो जाये तुझसे ।
सो नहीं पाता हूँ, जब तक तेरे ख्वाबो में खो न जाये ।
राहत मिलती है, तेरे नसीब की न कोई दरकार है मुझे ।
मुरीद बन गया हूँ तेरा, नसीब की न कोई दरकार है मुझे ।
पहचान की क्या जरूरत, पहचान खुद की मिटाने पे तुला हूँ ।
आवाज है ये दिल की, फरियाद न करता हूँ किसीसे ।
जब भी मांगा तुझे ही मांगा, तेरे सिवाय कोई न भाया ।
साया बनके रहूँ तेरे संग, तन की जरूरत न है मुझे ।
मौत आती है तो आने दे, मुझे पनाह मिल गयी तेरे दर पे ।


- डॉ.संतोष सिंह