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Hymn No. 807 | Date: 28-Feb-1999
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मैं पागल प्रेमी तेरा, देखते ही खो जाता हूँ तुझमें ।
मैं पागल प्रेमी तेरा, देखते ही खो जाता हूँ तुझमें ।
याद जो आयी तेरी, जान रहते हुये बेजान हो जाता ।
मेरा हर ज्ञान मिट जाता, जब तेरा ध्यान आता ।
भुलाये से जो न भूलता हूँ, तेरे ख्यालों में सब कुछ भुलाता हूँ ।
बचा न है आज कुछ पास मेरे, जो डूबा प्यार में तेरे ।
एक के बाद एक आते हैं ख्वाब, जो खोया रहता मैं यादो में तेरी ।
जिंदा रहने का बोध भी जाता रहा, जो जादू किया प्यार का तूने अपने ।
अंत चाहता हूँ अपना, तेरे प्यार की अनंत गहराइयों में ।
मंजूर न है आज मुझे, तेरे प्यार के सिवाय कुछ और ।


- डॉ.संतोष सिंह