VIEW HYMN

Hymn No. 808 | Date: 28-Feb-1999
Text Size
हमें तू ये बता क्यों करवाता है इंतज़ार इतना ।
हमें तू ये बता क्यों करवाता है इंतज़ार इतना ।
हम जितना आना चाहे पास तेरे उतना देर कर जाते ।
गडबडी न तेरे में है, गड़बड़ तो करते हैं हम ।
बाहें पसारे है तू, लड़खड़ा जाते हैं बीच में हम ।
दम रहते हुये भी, पहूँच न पाते पास तेरे ।
अपनी कमी को तेरी नाराजगी का नाम दे देते ।
दिल में प्यार बहुत है तेरे लिये, जताना आता नहीं ।
चाहते हुये तुझे, बह जाता हूँ दूसरी ओर ।
प्रभु आ जाये तारतम्य हमारे अंदर इतनी ।
बनके सिकंदर पहुचे तेरे दर की ओर ।


- डॉ.संतोष सिंह