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Hymn No. 809 | Date: 28-Feb-1999
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नगमें सुनाके दिल चुराता है तू ।
नगमें सुनाके दिल चुराता है तू ।
तेरी अदा लगती है इतनी प्यारी ।
जान खुद ब खुद निकल जाती है हमारी ।
रही सही कसर पूरी कर देती है तेरी निगाहें।
असर इतना होता है जिंदा होने का ध्यान न रहता ।
फिदा तो तू सबपे है, जान छिड़कते हैं हम तुझपे ।
दिन हो या रात इस दिल को रहता सदा तेरा अहसास ।
अब कोई बात न है ऐसी, जो छुपा रखी हो तुझसे ।
तेरे पास आते ही धडकता हुआ दिल बयाँ कर जाता है सब कुछ तुझसे ।
बचा न है कुछ, मेरा दम हरदम के लिये बन गया हूँ तेरा ।


- डॉ.संतोष सिंह