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Hymn No. 810 | Date: 01-Mar-1999
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कत्ल किया है तूने सरेआम इन्हीं निगाहो से ।
कत्ल किया है तूने सरेआम इन्हीं निगाहो से ।
उफ तक न किया चाहनेवालों ने कुर्बान होते रहे ।
सनम तुझको तेरी कसम, जुबाँ पे तेरा नाम न आने दिया ।
जब तक जियेंगे तेरा नाम गुनगुनाया है दिल से ।
भीतर-बाहर हमारे तू ही तो है, तेरे सिवाय कोई ना ।
देख किसी और को, तू ही तो है नजर आता ।
क्या न है कुछ करता, प्यार के नाम पे ।
चुपचाप निगाहों से जाम पिलाके मदहोश कर देता ।
दोष न है इसमें कोई तेरा, रह न पाते बिन तेरे ।
कदम खुद ब खुद तेरी और मुड़ हैं जाते।


- डॉ.संतोष सिंह