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Hymn No. 816 | Date: 04-Mar-1999
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झुकाऊँगा मैं तुझे प्यार से प्यार पाने के लिये ।
झुकाऊँगा मैं तुझे प्यार से प्यार पाने के लिये ।
राह में रोड़े डालूँगा हजार तूझे अपना बनाने के लिये ।
जिद में उतरना पड़ा तो उतर के दिखाऊँगा, तेरे पास आने के लिये ।
सर कटाना पड़ा तेरे लिये, पलक झपकते बलि दे दूंगा अपनी ।
जो भी बस में न है मेरे वो भी कर दिखाऊँगा तेरे लिये ।
सपनो को छोड, यथार्थ में जीवन का हर पल सौंप देंगे तेरे लिये ।
कमजोर कितना भी हूँ तेरे प्यार में कमजोरी जाती रही मेरी ।
ताकत रखता हूँ टकराने की किसी से भी तेरे लिये ।
मैं अपने प्यार की गर्मी से पत्थर को भी पिघला दूंगा ।
तू कितना भी कर ले, तुझें अपना बनाके छोडूंगा ।
- डॉ.संतोष सिंह
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