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Hymn No. 820 | Date: 05-Mar-1999
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आ आ... ए ऐ ऐ .. .. .. आका मेरे ऐ .. .. ..
आ आ... ए ऐ ऐ .. .. .. आका मेरे ऐ .. .. ..
अनर्गल प्रलाप न है, ये तो दिल की आवाज है ।
सुनके अनसुनी न कर पायेगा, पास मेरे दौड़ा चला आयेगा ।
सुर में सुर मिलाके तू गायेगा, भावो में अपने बहा ले जाऊंगा ।
अ आ ... इतना सरल न है पाना तूझे मैने ये जाना ।
प्यार जो हो गया तुझसे, पलक झपकते होता है तेरा आना ।
कोई जान पाये या न पाये, दिल तो जान लेता है तेरा आना ।
सताया तू कम न है मुझे, जताना जो न आता था प्यार हमको ।
परखता क्या है तू मुझे, दिल चीर के देख ले ।
हैरत में होगा तू, है हमारे भीतर या बाहर ।
सीखा तो तुझसे है प्यार करना और बिना कहे कह जाना सबकुछ।
अरे .... प्यारे यही तो प्यार है प्यार में मैं कहां और तू कहाँ ।


- डॉ.संतोष सिंह