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Hymn No. 83 | Date: 27-Feb-1997
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मानना है तुझे तेरी हर बात मुझे है माननी ।
मानना है तुझे तेरी हर बात मुझे है माननी ।
जीना है जब तक तेरे ही गीतों को है गाना ।
सहना है मूझे वो सब कुछ जो लगे नागवार ।
इंसान के रूप में ढल जाना है मुझे ले लेके नाम तेरा ।
शिकायतों का रोना ना रोना है मुझे किसी बात पे ।
तेरी मर्जी में मेरी मर्जी हो मन मेरा हो इतना सुलझा ।
तेरे पुकारने से पहले तेरे इशारों पे दौडा चला आऊँ ।
तन की क्या बात है, इस अमर आत्मा को तुझपे न्योछावर कर जाऊँ ।
नैन गीले मेरे किसी दुःख दर्द से ना है, ये तो है तेरे विरह में ।


- डॉ.संतोष सिंह