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Hymn No. 830 | Date: 08-Mar-1999
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छा रहा है तेरे प्यार का आलम ऐसा, हर शब्द गीत बनके उभर रहे है दिल में मेरे ।
छा रहा है तेरे प्यार का आलम ऐसा, हर शब्द गीत बनके उभर रहे है दिल में मेरे ।
बेइंतहा हो गयी है प्यार की, जालिम अब तक दूर कैसे थे हम तुझसे ।
पता हमें मालूम न था, तुझे सब मालूम होके क्यों न पास बुलाया हमें अपने।
क्या हम इतने गये बीते थे, दोष हमारा कम नहीं, पता नहीं तेरे बिन कैसे हम जीते थे ।
कहां कौन सी कब खता हुयी, जो होना पडा था अलग तुझसे हमे ।
याद दिलाना होगा सब कुछ तुझे, अगर तू चाहता है याद करना जरूरी है हमें।
होंगे हम कैसे भी पहले, प्यार किये बिना न रह सकते थे तुझसे ।
जिस जाल में फँसके दम तोड़ा इस बार, तेरे प्यार से उसे काटके छोडूंगा ।
पहचान लिया है दिलबर को इस दिल में, तेरा साथ नहीं अब छोडूंगा ।
इंतजार करना हमें आता है, सदियाँ बिता देंगे पल भर में डूबके तेरे प्यार में ।
चहेरे पे शिकन न आने दूंगा, दिल में प्यार है प्यार का गीत गाता रहूंगा ।
जवा हूं मैं सदा से, मौत आयेगी तो प्यार से इजाजत लेके ही जायेगी ।


- डॉ.संतोष सिंह