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Hymn No. 832 | Date: 09-Mar-1999
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बेइंतहा प्यार करता हूँ तुझसे, इनकलाब आ गया है मुझमें ।
बेइंतहा प्यार करता हूँ तुझसे, इनकलाब आ गया है मुझमें ।
जाम जो पिया निगाहों से तेरी, तसवीर बस गयी है दिल में मेरे ।
सारी हसरते दम तोड़ चुकी हैं, तेरी यादों के पीछे ।
मुस्कराता रहता हूँ हर पल, तेरे साथ होने के एहसास से ।
सर्द होता जा रहा है जिस्म मेरा, जान नहीं पाता क्या हो रहा है ।
सलामती तो बिछुडना है, कुर्बान हो जाना चाहता हूँ प्यार में तेरे ।
अंदाज न रहता किसीका, तेरे बिना खत्म हो जाती है दुनिया मेरी ।
जब तक गोता न मारुँ तुझमें, श्वास लेना भी कष्टमय है लगता ।
मुरीद हूँ तेरा बहुत पुराना, दामन पे लगे दागों की परवाह न है मुझे ।
प्यार जो तुझसे किया है, प्यार में कुर्बान हो जाना को चाहता हूँ ।
- डॉ.संतोष सिंह
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