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Hymn No. 834 | Date: 09-Mar-1999
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बस गया है तू मेरे रोम-रोम में, जीवन का हर पल बीत रहा है सानिध्य में तेरे।
बस गया है तू मेरे रोम-रोम में, जीवन का हर पल बीत रहा है सानिध्य में तेरे।
नजरो में समायी रहती है तसवीर तेरी, गुंजते है गीत मेरे कानो में तेरे ।
तेरे साथ होने का एहसास कराती है हवा, तुझे छूके महक जाती है वो ।
पुकारा हमने जब भी तुझे, पल भर का मौका गवाये बिना आवाज आयी तेरी।
तेरी बात सृष्टि की समग्र सत्ता करती है, नादान दिल कैसे न माने तुझे ।
पास कोई रहे या न रहे, हर पल तुझे अपलक निहारते बैठा हूँ ।
प्रेम से लेते है तेरा नाम, न आने जाने के लिये पुकारते है हम ।
कुछ भी कैसे कहूँ मैं तुझसे, कहने करवाने वाला जब एक तू ही हो ।
होम कर देना चाहूँ प्यार में तेरे, जिसके संग मेरा मैं जुडा हो ।
हर सोच जुड गयी जो तुझसे, तू ही बता तेरे सिवाय कैसे रह सकता हूँ मैं ।


- डॉ.संतोष सिंह