VIEW HYMN

Hymn No. 838 | Date: 11-Mar-1999
Text Size
लजाते है सौम्य तुझसे कुछ कहने में, देखा न करो सबके सामने ।
लजाते है सौम्य तुझसे कुछ कहने में, देखा न करो सबके सामने ।
गड़ जाती हैं निगाहे तेरे चरणों में, मचल जाता है दिल मेरा प्यार छलक उठता है ।
तुझे देखके लोग कर देंगे अनदेखा, प्यार का इलजाम मुझपे लगा बैठेगे ।
बिगाड़ा तूने नहीं बिगाड़ा हमने तुझे, सारा इलजाम लगाके सजा मुझको सुना देगे ।
सजा का डर न है मुझे, जुदा होना तुझसे मंजूर नहीं ।
गत मेरी जो भी बने, साँवरे प्यार तुझसे करते रहे सरेआम ।
पूजा कैसे करुँगा मैं तेरी, बावरा हो चुका हूँ प्यार में तेरे ।
रोम-रोम मेरा तेरे प्यार में डूबा रहेगा, हम तो तुझमें खोये रहेंगे ।
प्यार भी अजीब लगता है, इससे पहले कभी अनुभव न किया था ।
मस्ती सी रहती है तुझे याद कर-करके, इसके सामने कुछ अच्छा सा न है लगता ।


- डॉ.संतोष सिंह