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Hymn No. 839 | Date: 11-Mar-1999
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कह नहीं सकता कब क्या हो जाये, तुझे देखते-देखते कब होश खो जाये ।
कह नहीं सकता कब क्या हो जाये, तुझे देखते-देखते कब होश खो जाये ।
हाथ में न रह गया कुछ मेरे, जब से धरा है साथ तेरा ।
पहरा कोई लाख बिठा दे चारो ओर मेरे, मुलाकात तो होनी है तय समय पे तुझसे ।
नाम में क्या रखा है अब, कदम जिस दर पे रखा तेरा ही वास वहाँ पाया ।
बदला-बदला रहा रूप ऊपर का, दिल के निगाहो से छिपना तुझे भी न या ।
तय जो था उसमें भी फेर-फार पाया, माफ करना प्यार में बावरा बनके फिरते देखा तुझे ।
जादु कर रखा है सबपे तूने, प्यार के जादु का शिकार होते तुझे पाया ।
खेल खेलना कोई तुझसे सीखे, प्यार का रोग लगता हमको तू और बनता अनजान ।
मिलना बिछुडना कब तक चलेगा, हम दीवानो को मौका दे दे जी भरके प्यार करने का ।
मेरे हालात पे तरस खाके करीब मत आना, प्यार किया हूँ कोई सौदा नहीं ।


- डॉ.संतोष सिंह