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Hymn No. 840 | Date: 11-Mar-1999
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जब भी देखा मुस्कराते देखा, तेरे सामने गमों को दम तोड़ते देखा ।
जब भी देखा मुस्कराते देखा, तेरे सामने गमों को दम तोड़ते देखा ।
मुख न मोड़ते पाया किसीसे, अपनों की तू छोड़ न चाहने वालो का तुझे गले लगाते देखा ।
न जाने क्या जादू है तुझमें, तेरे आगे जोर चलते नहीं देखा किसीका ।
राजा है तू सबके दिलों का, इश्क में मारा-मारा फिरता है अपने दीवानों के ।
थोथा दम भरा धारणाओ को टूटते देखा, पूजा को तेरे आगे प्यार में बदलते देखा ।
मिटते पाया सारे गरुरों को, दुनिया की हर मान्यताओ को टूटते पाया तेरे सामने ।
शरारत से भरा तुझको पाया, शरमा जाते हैं बच्चे भी देखके तेरी शरारत ।
सबका अपना-अपना सत्य है, तेरे सत्य के आगे हर सत्य तो झूठमें बदलते देखा ।
बचना चाहता हूँ परंपराओ से, हम तो तेरे प्रेम में मसरूफ रहना चाहते है ।
तेरे आगे जोर किसीका न है चलता, दिलवालों के सामने तुझे भी फिसलते देखा ।


- डॉ.संतोष सिंह